Indian Cricket world Cup History


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India World Cup 1983

1983 की विश्वकप विजय के बारे में हर क्रिकेट प्रेमी जानता है। 25 जून 1983 का दिन भारतीय क्रिकेट इतिहास में अजर-अमर है। कमज़ोर मानी जाने वाली भारतीय टीम ने कपिल देव की कप्तानी में आज ही के दिन वेस्टइंडीज़ जैसी मज़बूत टीम को पटखनी दी थी। यह भारत की क्रिकेट में पहली सबसे बड़ी सफलता थी। आज भारत की पहली विश्व कप जीत 29 साल की हो गई। इस मौके पर याद करते हैं लॉर्ड्‍स के ऐतिहासिक मैदान पर भारत वेस्टइंडीज़ के बीच खेल गए विश्व कप फाइनल मैच को।





क्रिकेट प्रेमी तो दूर, कोई भारतीय खिलाड़ी भी उस समय विश्व कप जीतने के बारे में सोच नहीं रहा था। भारत के सलामी बल्लेबाज श्रीकांत की तब नई-नई शादी हुई थी। उन्होंने अपनी पत्नी से मजाक करते हुए कहा था कि हम इंग्लैंड विश्व कप जीतने नहीं बल्कि हनीमून मनाने जा रहे हैं। तब कौन जानता था कि कपिल के जांबाज खिलाड़ी इतिहास रचने जा रहे हैं।


फाइनल में वेस्टइंडीज के कप्तान क्लाइव लॉयड ने टॉस जीतकर पहले भारत को बल्लेबाजी के लिए कहा। भारतीय टीम 54.4 ओवरों में केवल 183 रन जोड़कर आउट हो गई। सबसे अधिक 38 रन श्रीकांत ने बनाए थे। यहां तक मैच में वही हो रहा था, ‍जो सोचा जा रहा था। भारतीय टीम वेस्टइंडीज की काली आंधी (गेंदबाज़ी आक्रमण) के सामने कम स्कोर बना पाई थी। सभी सोच रहे थे कि मैच जल्द खत्म हो जाएगा, लेकिन कपिल के जांबाज कुछ और इरादे लेकर ही मैदान में उतरे थे।



वेस्टइंडीज़ के सलामी बल्लेबाज गार्डन ग्रिनीज़ को बलविंदर संधू ने 1 रन के निजी स्कोर पर बोल्ड कर दिया। इस समय वेस्टइंडीज का स्कोर 5 रन था। हालांकि इसके बाद डेसमंड हैंस और विवयन रिचर्ड्‍स ने वेस्टइंडीज़ की पारी को दिशा दी। ‍जब ये दोनों बल्लेबाज दूसरे विकेट के लिए 45 रन जोड़ चुके थे, तब फिर लगने लगा कि इंडीज की लगातार तीसरी बार विश्व कप जीतने की तमन्ना पूरी हो रही है।



लेकिन इसी स्कोर पर मदन लाल ने हैंस को रोजर बिन्नी के हाथों कैच करवा दिया और इंडीज का स्कोर 50/2 हो गया। अभी स्कोर कार्ड में 7 रन ही जुड़े थे कि भारत की जीत में सबसे बड़ा रोड़ा विवियन रिचर्ड्‍स को मदन लाल ने अपने कप्तान के हाथों कैच करवाया और भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को आन्दोलित कर दिया। रिचर्ड्‍स ने 33 रन बनाए और इंडीज की इस पारी में यह सबसे बड़ा स्कोर रहा। ‍भारतीय कप्तान ने बहु‍त दूर तक दौड़ लगाकर रिचर्ड्‍स का मुश्किल कैच लपका था। कपिल ने यह कैच नहीं बल्कि विश्व कप लपका था। रिचर्ड्‍स के आउट होते ही भारतीय खिलाड़ियों में नई जान आ गई और टीम इंडिया इंडीज पर पूरी तरह हावी हो गई।



76-6 के स्कोर के बावजूद जेफ डुज़ोन और मेल्कम मार्शल की जोड़ी जम गई और इंडीज मैच में वापसी करता दिखाई दिया। दोनों बल्लेबाज़ स्कोर को 119 तक ले गए। तभी स्लिप में खड़े सुनील गावस्कर ने भारतीय कप्तान से मोहिंदर अमरनाथ को गेंदबाज़ी करवाने को कहा। कप्तान ने सीनियर खिलाड़ी की सलाह मानी और अमरनाथ ने डुज़ोन (25) और मार्शल (18) को पैवेलियन लौटाकर भारत की विश्व कप खिताबी जीत पर मुहर लगा दी।



वेस्टइंडीज की पूरी टीम 52 ओवरों में 140 रन पर आउट हो गई और भारत ने यह मैच 43 रनों के अंतर से जीत लिया। मोहिन्दर अमरनाथ को उनके हरफनमौला प्रदर्शन (26 रन और 3 विकेट) के लिए मैन ऑफ द मैच चुना गया। (वेबदुनिया)



India world Cup 2011

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भारतीय टीम के निवर्तमान कोच गैरी कर्स्टन ने कप्तान महेंद्रसिंह धोनी की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि कप्तान ने न सिर्फ उदाहरण पेश करते हुए अगुआई की और मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ करने की कोशिश की बल्कि टीम के हारने पर उन्हें सबसे ज्यादा दु:ख भी हुआ।


कर्स्टन ने कहा धोनी ने कप्तानी में उदाहरण पेश किया। मैंने कभी ऐसा खिलाड़ी नहीं देखा जो प्रत्येक मैच में जीत के लिए हर संभव कोशिश करता है। वह एक संपूर्ण व्यक्ति है। मैंने कभी उसे अपना आपा खोते हुए नहीं देखा। वह जिम्मेदारी लेना पसंद करता है और जब टीम हारती है तो सबसे अधिक दु:खी वही होता है। 



उन्होंने कहा कि वह महान कप्तान है। वह अगले कुछ वषरें तक कप्तान बना रहेगा, इसमें कोई संदेह नहीं है। कर्स्टन ने जब भारतीय क्रिकेट में कोचिंग का पद संभाला तो उन्हें इसका पिछला अनुभव नहीं था। दक्षिण अफ्रीका के इस पूर्व क्रिकेटर ने कहा कि वह ऐसा माहौल तैयार करना चाहते थे, जिसमें टीम खुश रहे और इसकेलिए वह बहुत हद तक स्टार बल्लेबाज सचिन तेंडुलकर पर निर्भर थे।



उन्होंने कहा मानव प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण होता है। आपको क्रिकेटर को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का मौका देना होता है। यह प्रत्येक को समझने, उनकी क्षमताओं पर काम करने और उनकी तकनीक को बदले बिना उनमें सुधार करना है। कर्स्टन ने कहा मैं ऐसा माहौल तैयार करना चाहता था जिसमें टीम खुश रहे और टीम की तरह महसूस करे। इस मामले में सचिन मेरेलिए नेतृत्वकर्ता थे।



उन्होंने कहा कि यदि तेंडुलकर 2015 विश्वकप तक खेलते हैं तो यह काफी अच्छा रहेगा लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि तब तक वह उम्रदराज हो जाएँगे और अब वह सोच समझकर आगे की योजना बनाएँगे। 2015 तक सचिन 42 साल के हो जाएँगे। मुझे लगता है कि (यदि वह विश्वकप में खेलते हैं) यह अच्छा रहेगा। वह संन्यास नहीं लेना चाहते क्योंकि वह खेल का लुत्फ उठा रहे हैं। मुझे उन पर गर्व है लेकिन उनकी उम्र बढ़ रही है और आगे उन्हें यह योजना बनानी होगी कि किस मैच में खेलना है और किसमें नहीं।



कर्स्टन ने कहा उनकी तैयारी काफी अच्छी थी और उसने अपनी गेंदबाजी पर कड़ी मेहनत की। युवी के 'मैन ऑफ द टूर्नामेंट' बनने से मुझे उस पर काफी गर्व है। विश्वकप को याद करते हुए इस कोच ने कहा कि उन्हें खुशी है कि टीम ने ग्रुप चरण में जो भी मैच खेला वह करीबी रहा क्योंकि इसने टीम को नाकआउट चरण के लिए तैयार किया।



कर्स्टन ने कहा कि वह भारत आते रहेंगे और भविष्य में किसी आईपीएल टीम को कोचिंग देने पर भी विचार कर सकते हैं। उन्होंने कहा मैं निश्चित तौर पर भारत आने पर विचार करूँगा। कोचिंग के नजरिये से निश्चित तौर पर आईपीएल एक जरिया है। लेकिन मुझे नहीं पता कि मैं क्या करने वाला हूँ। 



यह पूछने पर कि क्या उन्हें तुनकमिजाज तेज गेंदबाज एस. श्रीसंथ से निपटने में दिक्कत होती है, जिन्हें लेकर कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भी हाथ खड़े कर चुके हैं। उन्होंने कहा पैडी ने श्रीसंथ के साथ काफी समय बिताया है। वह काफी कुशल है। श्री को अपनी निरंतरता पर काम करने की जरूरत है। उन्होंने हमारे लिए लगातार सात टेस्ट खेले हैं और वह अहम था। श्रीसंथ अगर अपने क्रिकेट को अगले स्तर पर नहीं ले जाता तो यह प्रतिभा को व्यर्थ करना है। कर्स्टन ने भारतीय प्रशंसकों को भी धन्यवाद दिया जिन्होंने उन्हें उतना ही सम्मान दिया जितना उनके खिलाड़ियों ने।



भारतीय कोच ने स्वीकार किया कि टीम इंडिया के कोच के रूप में दक्षिण अफ्रीका टीम के विश्वकप से बाहर होने से वह खुश थे लेकिन वह अपने देश के लिए दु:खी थे। कर्स्टन ने अपने देश की मीडिया से भी अपील की कि टीम को चोकर कहना बंद कर दिया जाए।



उन्होंने कहा दक्षिण अफ्रीकी मीडिया जब चोकर का ठप्पा लगाती है तो मुझे चिंता होती है। जब विरोधी मीडिया ऐसा करे तो मुझे समझ में आता है लेकिन आपकी मीडिया को ऐसा नहीं करना चाहिए। मैं उनके लिए दु:खी हूँ। ग्रीम स्मिथ ने कहा यह आसान नहीं है, हम प्रयास कर रहे हैं और यह सच है कि यह आसान नहीं है। (भाषा)